क्या होती है EMI? | कैसे करते है EMI का आकलन?

What is EMI? How to Calculate?

हमारी जिंदगी में हमें कब किसी चीज की जरूरत पड़ जाए उसके बारें में अनुमान लगाना लगभग असंभव होता है। उसी प्रकार कई बार हमारें सामने ऐसे हालात आ जाते है जब हमें काफी बड़ी रकम की आवश्यकता होती है। जैसेकि शादी, पढ़ाई, घर की मरम्मत या फिर किसी बीमारी के इलाज के लिए।

कहा जाता है कि ऐसे में जब आपके पास पर्याप्त धन ना हो तो ऐसे में लोन लेना ही सबसे सर्वोत्तम उपाय होता है। लोन लेने के लिए आप या तो किसी बैंक या फिर किसी वित्तिय संस्थान में आवेदन कर सकते है जिनके द्वारा आपको लोन चुकाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है।

इसमें आपको हर महीने की लोन की राशि क़िस्त के रूप में यानी EMI के रूप में देनी होती है। अगर आप घर लेना चाहते है तो आप होम लोन ले सकते है, अगर कोई कार लेना चाहते है तो कार लोन ले सकते है और अन्य किसी जरूरत के लिए पर्सनल लोन ले सकते है। हर तरह के लोन को चुकाने के लिए आपको लोन की EMI देने के लिए अलग-अलग समय मिलता है।

इस बढ़ती हुई महंगाई के दौर में EMI के द्वारा लोन चुकाने से आप चिंता मुक्त रह सकते है क्योंकि इसमें आपको एक साथ लोन की राशि नहीं चुकानी होती है और आप पहले से ही जानते है कि आपको हर महीने कितने रुपये की EMI देनी है।

क्या होती है EMI?

EMI जिसे Equated Monthly Installment कहा जाता है, ये एक निश्चित राशि होती है जो आपको बैंक या फिर जिस संस्थान से लोन लिया होता है वहां हर महीने चुकाना होता है। आपको EMI चुकाने के लिए एक निश्चित अवधि दी जाती है। अगर सरल शब्दों में समझा जाए तो EMI एक तरह की सुविधा है जो बैंक एवं वित्तिय संस्थानों को अपने ग्राहकों को दी जाती है जब वो किसी वित्तिय संकट से जूझ रहे होते है।

लोन को EMI में चुकाने के लिए पहले एक ब्याज दर सुनिश्चित की जाती है जिसके बाद EMI की राशि निश्चित की जाती है और लोन की EMI चुकाने के लिए ग्राहक की आवश्यकता अनुसार समय दिया जाता है। ग्राहक को हर महीने एक निश्चित तारीख पर EMI चुकानी होती है, आप चाहें तो EMI को चेक के द्वारा या ECS फैसिलिटी के द्वारा भी चुका सकते है।

क्या होता है EMI में?

किसी भी EMI में दो चीजें होती है वो है मूलधन और ब्याज, शुरू के कुछ समय में EMI में ज्यादा हिस्सा ब्याज का होता है जबकि जैसे-जैसे समय बढ़ता जाता है वैसे-वैसे उसमें ब्याज की राशि कम होने के साथ-साथ मूलधन की राशि बढ़ने लगती है। किसी भी लोन की EMI में सबसे ज्यादा हिस्सा मूलधन का होता है जबकि ब्याज का हिस्सा कम होता है।

Amortization Schedule क्या होता है?

Amortization Schedule किसी भी लोन की EMI समझने के लिए बेहद जरूरी होता है, दरअसल Amortization Schedule एक टेबल होती है जिसके द्वारा आपको आपके लोन की पूरी जानकारी बताई जाती है और इसमें आपकी EMI का पूरा ब्रेकअप भी समझाया जाता है। इसमें हर EMI के मूलधन और ब्याज की राशि भी बताई जाती है। इसके द्वारा आपको अपने लोन को समझने और भविष्य की सभी EMI के बारें में आपको जानकारी दी जाती है।

Amortization Table में अपने कितना लोन लिया है, उसमें कितना ब्याज देना है, आपको कब-कब EMI देनी है, ये सभी जानकारी लिखी होती है। इससे आपको ये समझने में काफी आसानी रहती है कि आपका लोन किस प्रकार काम कर रहा है और कई बार टैक्स बेनिफिट लेने के लिए भी आपको इसकी जरूरत पड़ती है।

EMI कैसे कैलकुलेट की जाती है?

किसी भी लोन की EMI कैलकुलेट करने के लिए गणितीय फार्मूला की सहायता ली जाती है, EMI को कैलकुलेट करने का फार्मूला है

P×R×(1+R)^N/((1+R)^N-1)

इसमें P का मतलब लोन की राशि से होता है, R से मतलब ब्याज दर से होता है जिस पर महीने की EMI निर्धारित की जाती है। N से अभिप्राय लोन चुकाने की अवधि से होता है।

चलिए आपको एक उदाहरण के द्वारा EMI कैलकुलेट करके दिखाते है, मान कर चलिए विनय ने 5 लाख रुपये का लोन लिया है जिसके लिए उन्हें 12% ब्याज की दर से लोन चुकाना है और लोन की अवधि 3 साल है तो अगर हम ऊपर बताए गए फार्मूला से लोन की EMI कैलकुलेट करें तो लोन की EMI 16,607 प्रतिमाह बनेगी।

EMI को प्रभाव करने वाले कारक

किसी भी लोन की EMI को प्रभावित करने वाले कुछ कारक होते है

  • Principal Loan Amount: principal लोन अमाउंट दरअसल वो लोन राशि होती है जो हम किसी बैंक से या किसी वित्तिय संस्था से लेते है। किसी भी EMI को प्रभावित करने में ये सबसे बड़ा कारक होता है और इसी की वजह से EMI निर्धारित की जाती है। अगर लोन की राशि ज्यादा होगी तो EMI की राशि भी अपने आप ज्यादा हो जाएगी।
  • ब्याज दर: ये वो दर होती है जिस पर बैंक या वित्तिय संस्थान द्वारा किसी को भी ऋण दिया जाता है और EMI का निर्धारण करने में इसकी भी अहम भूमिका होती है। ब्याज दर का निर्धारण ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल और अन्य गणनाओं पर आधारित होती है।
  • लोन की अवधि: लोन की अवधि का मतलब उस समय काल से होता है जिसके दौरान लेनदार के द्वारा लोन की राशि को एक निश्चित अवधि में चुकाया जाएगा। अगर लोन की अवधि ज्यादा होती है तो लेनदार को उस लोन के लिए बैंक या वित्तिय संस्थान को ज्यादा ब्याज चुकानी पड़ती है।

ब्याज दर के प्रकार

Fixed Interest Rate

जब किसी भी लोन में ब्याज दर पूरी अवधि के लिए फिक्स्ड रहती है तो लोन की EMI पूरी अवधि के लिए एक जैसी रहती है। आमतौर पर फिक्स्ड ब्याज दर फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट के मुकाबले 1 से 2 प्रतिशत ज्यादा होती है। हालांकि फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट होने की वजह से ब्याज दर में पूरी लोन की अवधि के दौरान बदलाव नहीं आता है और आपको ये पहले से ही पता होता है कि आपको भविष्य में कितनी EMI देनी है।

Floating Interest Rate

जिस भी लोन में फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट होता है तो उसमें ब्याज दर बाजार के मुताबिक कम या ज्यादा होता रहता है। फ्लोटिंग ब्याज दर लोन देने वाले बैंक या वित्तिय संस्था के द्वारा ऑफर की जाने वाले बेस रेट पर निर्भर करता है। इसलिए जब भी बेस रेट में बदलाव आता है तो ब्याज दर अपने आप बदलती रहती है।

फिक्स्ड ब्याज दर या फ्लोटिंग ब्याज दर

जैसाकि अब तक हम समझ चुके है कि लोन की ब्याज दर फिक्स्ड होने की वजह से हम अपनी EMI को लेकर चिंतामुक्त रह सकते है। लोन के लिए फिक्स्ड ब्याज दर होने की वजह से हम चुकाने वाली राशि को लेकर आश्वस्त रहते है। अगर आप दिन-प्रतिदिन बढ़ने वाली ब्याज दर के खतरे से बचना चाहते है तो ऐसे में फिक्स्ड ब्याज दर सबसे बेहतरीन है और जब लोन चुकाने की अवधि 3 से 10 साल के बीच होती है तो फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट को सबसे बेहतरीन माना जाता है।

लेकिन बहुत से विशेषज्ञों के द्वारा अगर लोन की अवधि 20 से 30 सालों की है तो लोन चुकाने के लिए फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट का चुनाव करना ही बेहतर माना जाता है। जब आपको इस बात की जानकारी हो कि बेस रेट पूरी लोन की अवधि के दौरान एक जैसा ही रहेगा तो आपको अपने लोन के लिए फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट का ही चुनाव करना चाहिए। इसके द्वारा अगर आप चाहें तो प्री-पेमेंट करने की भी योजना बना सकते है जिससे आपके लोन पर लगने वाले कुल ब्याज की राशि कम हो जाएगी और इससे आपकी काफी बचत भी होगी।

क्या लोन अवधि के दौरान EMI में बदलाव आता है?

जैसा कि हम अब तक पढ़ चुके है कि किसी भी लोन की EMI अलग-अलग चीजों पर निर्भर करती है जैसे कि लोन राशि, ब्याज दर और लोन की अवधि। हालांकि कई बार लोन की अवधि के दौरान EMI की राशि मे बदलाव आ सकता है और ऐसा होने के पीछे मुख्य वजह निम्नलिखित है।

  • लोन का Prepayment: बहुत से बैंक और वित्तिय संस्थान आपको समय से पहले लोन की राशि का कुछ हिस्सा एक साथ वापसी करने की सुविधा देते है जिसे Prepayment कहा जाता है। इस सुविधा के द्वारा आप अपने बचे हुए लोन की कुछ राशि को एक-मुश्त किश्त में बैंक को चुका सकते है जिसके बाद आपके द्वारा लिए गए लोन की मूल राशि में कमी आ जाती है और फिर आपकी EMI भी अपने आप कम हो जाती है।
  • Progressive EMI: बहुत से वित्तिय संस्थानों द्वारा आपको लोन को चुकाने के लिए Progressive EMI का भी विकल्प दिया जाता है। इसमें लेनदार को एक निश्चित समय तक Fixed EMI देनी होती है जिसके बाद लोन की मूल राशि मे थोड़ी बढ़ोतरी होती है। इस तरह की चीजें ज्यादातर लंबे समय की लोन अवधि के लिए इस्तेमाल की जाती है।
  • Floating Interest Rate: अगर आपने फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट पर लोन लिया है तो पूरे लोन की अवधि तक आपकी EMI में कोई बदलाव नहीं आएगा तो वहीं अगर आप Floating इंटरेस्ट रेट को चुनते है तो ब्याज दर में किसी भी तरह के बदलाव आने की वजह से EMI में भी बदलाव आता है।

EMI कैलकुलेटर क्या होता है?

कोई भी EMI कैलकुलेटर एक ऐसा टूल है जिसके द्वारा मासिक किश्त यानी EMI को कैलकुलेट किया जाता है और इसमें EMI का निर्धारण आपके द्वारा दी गई जानकारियां, लोन की अवधि, ब्याज दर और लोन राशि के द्वारा किया जाता है। EMI कैलकुलेटर के द्वारा लोन लेने वाले व्यक्ति को इस बात की सही जानकारी भी मिल जाती है कि उन्हें EMI के रूप में कितनी राशि देनी है। EMI कैलकुलेटर बहुत से प्रकार के EMI कैलकुलेट करने में मदद करता है जैसे कि

  • होम लोन EMI कैलकुलेटर
  • एजुकेशन लोन कैलकुलेटर
  • पर्सनल लोन कैलकुलेटर

क्या फायदे होते है EMI कैलकुलेटर के?

EMI कैलकुलेटर के बहुत से फायदे होते है जिनमे से कुछ मुख्य फायदे निम्नलिखित है

  • वित्तीय योजना: आजकल बहुत से EMI कैलकुलेटर ऑनलाइन उपलब्ध है, ये EMI कैलकुलेटर हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होते है। इसकी मदद से हम हर माह के अपने खर्चे को अच्छे से समझते हुए भविष्य के लिए किस प्रकार से निवेश कर सकते है, इन सबकी जानकारी प्राप्त होती है।
  • समय की बचत: जब से ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर आए है तब से मैन्युअल कैलकुलेशन की जरूरत ही समाप्त हो चुकी है। ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर की मदद से आप बड़ी ही आसानी और जल्दी ही ये पता लगा सकते है कि आपके लोन के लिए आपको कुल कितना पैसा चुकाना होगा। तो इससे हुई ना आपके समय की बचत।
  • तुलना में आसानी: ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर की मदद से आप लोन के लिए आपको मिल रहे अलग-अलग ऑफर्स की भी एक साथ तुलना कर सकते है। अपनी जरूरत के हिसाब से लोन राशि और लोन अवधि डालकर आप अलग-अलग तरह से परिणाम देख सकते है और ये जानकारी आपके लिए काफी काम की हो सकती है।
  • सटीक आंकड़े: ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर के द्वारा की जाने वाली कैलकुलेशन कंप्यूटर के द्वारा होती है तो आप इस बात का संतोष रख सकते है आपको EMI कैलकुलेटर के द्वारा जो भी परिणाम बताया गया है वो बिल्कुल सही है। आपको आपके द्वारा चुकाए जाने वाले कुल राशि की बिल्कुल सही जानकरी मिल जाती है।
  • इस्तेमाल में आसान: अब भविष्य में आपके द्वारा लोन के लिए कुल कितनी रकम चुकाई जाएगी इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको अब बैंक के चक्कर लगाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर को आप कही से भी अपने कंप्यूटर या मोबाइल पर बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर सकते है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या EMI अच्छी है या बुरी?

जैसा कि हम जानते है कि EMI के द्वारा अपने लोन को आसान किस्तों में चुकाने का अवसर मिलता है लेकिन यहां हमें ये भी समझना होगा कि EMI के द्वारा भुगतान करने में हमे कुल ली गई राशि से ज्यादा राशि चुकानी पड़ती है। ये ज्यादा राशि ब्याज एवं प्रोसेसिंग फीस की वजह से होती है। इसके अलावा अगर आप समय से अपनी EMI चुकाने में असफल रहते है तो आपको उसके बदले में पेनल्टी देनी पड़ती है जोकि अतिरिक्त चार्ज के रूप में होती है और इसका प्रभाव आपके क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है।

EMI और लोन में क्या फर्क है?

लोन वो राशि होती है जो किसी बैंक या वित्तीय संस्थानों द्वारा दी जाती है और इसके बदलें में लोन लेने वाले और लोन देने वाले के बीच एक करार होता है कि लोन की राशि को ब्याज की राशि समेत तय समय में चुकाया जाएगा। EMI उस लोन को चुकाने के लिए एक जरिया होता है जिसमें लोन की राशि जिसमें ब्याज जुड़ा होता है, को हर महीने एक निश्चित राशि के रूप में चुकाया जाता है।

क्या पर्सनल लोन की EMI पर GST लगता है?

लोन के ब्याज या लोन राशि पर GST नहीं लगता है बल्कि GST प्रोसेसिंग फीस एवं अन्य चार्ज के ऊपर लगता है।

क्या होगा अगर समय पर EMI ना भरी जाए तो?

अगर समय पर EMI नहीं भरी जाती है तो व्यक्ति के क्रेडिट स्कोर पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ता है, आमतौर पर अगर कोई ग्राहक अपनी एक EMI देना भूल जाता है तो बैंक उसे डिफॉल्टर की लिस्ट में नहीं डालती है बल्कि 3 EMI छूट जाने के बाद बैंक नियमित रूप से ग्राहक को ये याद दिलाता रहता है कि उसकी EMI छूट गई है। जिसके बाद बैंक लेट फीस एवं अन्य चार्ज लगा देता है।

No Cost EMI क्या होता है?

No Cost EMI का मतलब ये होता है कि आपको आपके द्वारा लिए गए लोन के लिए अलग से कोई ब्याज नहीं देना होता है। आमतौर पर No Cost EMI का ऑफर ऑनलाइन स्टोर्स के द्वारा दिया जाता है और वो भी स्माल टिकट साइज की खरीद के लिए। जिसमें Consumer Durables और इलेक्ट्रॉनिक इत्यादि आते है।

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